40 से कम उम्र में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को लेकर रहें सतर्क

विश्व हृदय दिवस

विश्व हृदय दिवस के अवसर पर तीन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापदंडों – रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की नियमित निगरानी के महत्व पर जोर देता है। ये मापदंड हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम का संकेत दे सकते हैं। कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम कारक अक्सर बिना किसी स्पष्ट चेतावनी संकेत के चुपचाप विकसित होते हैं। भारत में, हृदय संबंधी रोग (CVDs) भारत में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं, जो दर्ज की गई कुल मृत्यु दर का लगभग 28.9% और सभी गैर-संचारी रोग (NCD) से होने वाली मौतों का लगभग 45% है। भारत में हृदय संबंधी रोगों से 3.16 मिलियन से अधिक मौतें दर्ज की गईं, जो वैश्विक स्तर पर दिल के दौरे से होने वाली सभी मौतों का लगभग 20% है।

इस्केमिक हृदय रोग (कोरोनरी धमनी रोग और दिल के दौरे) प्रमुख कारण है, जो देश में होने वाली सभी हृदय संबंधी मौतों में 50% से अधिक के लिए जिम्मेदार है। अब लगभग हर पांच में से एक हार्ट अटैक का मरीज 40 वर्ष से कम उम्र का पाया जा रहा है। इसके पीछे तेजी से हो रहा शहरीकरण, मेटाबोलिक सिंड्रोम, मधुमेह, केंद्रीय मोटापा और आनुवंशिक प्रवृत्ति जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि कम उम्र (45 साल से कम) में होने वाले हार्ट अटैक के मामलों में धूम्रपान सबसे बड़ा जोखिम कारक है (यह 70% तक मामलों में देखा जाता है)। कम उम्र में AMI (हार्ट अटैक) के मरीज़ों में ज़्यादातर पुरुष होते हैं (लगभग 90%)।

यह महत्वपूर्ण जानकारी इंदौर के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश जैन, सीनियर कंसलटेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, महावीर क्लीनिक एवं डायग्नोस्टिक सेंटर, गीता भवन चौराहा ने विश्व हृदय दिवस के अवसर पर साझा की।

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